हरियाणा। दयाराम वशिष्ठ
एक माँ अपने बच्चे के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। झांसी के बरुआसागर गांव की वंदना ने यही साबित किया। आर्थिक तंगी और कर्ज के बावजूद उन्होंने अपनी एक महीने की बच्ची का जीवन बचाने के लिए 400 किलोमीटर दूर हरियाणा के बघौला स्थित श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल का रुख किया।
बेटी की बिगड़ती हालत और बेबसी
11 जुलाई को वंदना ने बच्ची को जन्म दिया। पति रेहड़ी पटरी लगाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। जन्म के कुछ दिन बाद ही बच्ची का पेट फूलने लगा और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। वंदना ने स्थानीय सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज करवाया, यहां तक कि 90 हजार रुपये कर्ज भी ले लिया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने बच्ची की कई गंभीर बीमारियों का हवाला देकर परिवार का हौसला तोड़ दिया।
यू-ट्यूब ने दिखाई उम्मीद
23 रातों तक बिना सोए, लगातार समाधान ढूंढ रही वंदना ने यू-ट्यूब पर खोजकर श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल के बारे में जाना, जहां दिल की बीमारी का मुफ्त इलाज होता है। वे तुरंत बच्ची को लेकर बघौला पहुंचीं।

डॉक्टर बने भगवान
कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. परमवीर सिंह व उनकी टीम ने बच्ची की गंभीर स्थिति देखते हुए तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया। दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
भावुक वंदना ने कहा—
“मैंने भगवान को कभी नहीं देखा, लेकिन इस अस्पताल में डॉक्टर भगवान के रूप में जरूर मिले।”
संघर्ष से मिली जीत
23 दिन तक नींद न लेने वाली वंदना ने बच्ची की सफल सर्जरी के बाद पहली बार चैन की नींद ली। उन्होंने झांसी के अस्पतालों के विपरीत यहां के डॉक्टरों और स्टाफ की संवेदनशीलता की खुलकर सराहना की।
डॉ. परमवीर सिंह ने कहा—
“यह पूरी टीम का सामूहिक प्रयास था। आज बच्ची स्वस्थ है और यह दिखाता है कि माँ का साहस और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है।”