पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे थे

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे थे

नई दिल्ली, 5 अगस्त : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने दोपहर 1:12 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले काफी समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। 11 मई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कई राज्यों के राज्यपाल रह चुके थे सत्यपाल मलिक

मलिक बिहार, गोवा, मेघालय और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रह चुके थे। साल 2018 में ओडिशा का अतिरिक्त प्रभार भी उन्होंने संभाला था।
वे 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ही, 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया गया था।

मोदी-शाह की नीतियों पर उठाते रहे सवाल

सत्यपाल मलिक मोदी सरकार के खिलाफ अपनी मुखर राय के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की नीतियों पर सवाल उठाए थे।
17 अक्टूबर 2021 को राजस्थान के झुंझुनूं में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया था कि राज्यपाल रहते हुए उन्हें घूस की पेशकश की गई थी।

मलिक के मुताबिक, उनके पास दो फाइलें आई थीं—एक एक बड़े उद्योगपति से जुड़ी थी और दूसरी महबूबा मुफ्ती तथा भाजपा सरकार में एक पूर्व मंत्री से संबंधित थी। उनके सचिवों ने इन फाइलों में घोटाले की आशंका जताई, जिसके बाद उन्होंने दोनों डील रद्द कर दीं।
उन्होंने बताया था कि उन्हें 150-150 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। उन्होंने कहा था, “मैं पांच कुर्ता-पायजामे लेकर आया हूं और उसी के साथ वापस जाऊंगा। CBI पूछेगी तो नाम भी बता दूंगा।”

CBI जांच और चार्जशीट

CBI ने सत्यपाल मलिक के बयानों के बाद दो FIR दर्ज की थीं:

  1. 60 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत का मामला, जो 2017-18 में जम्मू-कश्मीर कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़ा है।
  2. दूसरा मामला 2019 में 2,200 करोड़ रुपए के कीरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के सिविल वर्क्स से जुड़ा है।

22 मई 2024 को CBI ने मलिक सहित 5 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इससे पहले 22 फरवरी 2024 को CBI ने मलिक के दिल्ली स्थित ठिकाने समेत 29 अन्य स्थानों पर छापेमारी की थी।

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